राम मंदिर में बेशकीमती हार और चरण पादुका गायब, SIT जांच में उलझा मामला

अयोध्या
 राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के समय जौनपुर के विश्वकर्मा परिवार की ओर से उपहार में दिया गया बेशकीमती हार व चरण पादुका विशेष जांच दल (एसआइटी) के लिए अबूझ पहेली बन गया है।

चौथे दिन एसआइटी ने हार व चरण पादुका को खोजने या उसकी जानकारी लेने का प्रयास किया, परंतु पता नहीं चला। रामशंकर यादव टिन्नू व कृष्णदेव तिवारी के साथ रामलला के चार पुजारियों को भी बुलाया गया।

पुजारी मोहित पांडेय ने बताया कि मैंने हार पहनाने के बाद टिन्नू को वापस कर दिया था। टिन्नू यही रट लगाए है कि उसे ईंट के रूप में गलाने को बेंगलुरु भेजा गया था। अब एसआइटी हार का असली पता खोज रही है।

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सूत्रों ने बताया कि एसआइटी के सदस्य लखनऊ कमिश्नर विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज आइजी किरण एस. व विशेष सचिव वित्त विभाग नीलरतन कुमार ने गुरुवार दोपहर तीन बजे हार व चरण पादुका की खोज शुरू की।

राम मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव के माध्यम से तीन वरिष्ठ पुजारियों अशोक उपाध्याय, संतोष तिवारी व प्रेमचंद्र त्रिपाठी और साल भर पहले नियुक्त पुजारी मोहित पांडेय को ग्रीन हाउस बुलाया गया। जब यह पता चला कि उस समय वरिष्ठ पुजारी नहीं, युवा पुजारी मोहित पांडेय थे, तो उनसे तस्दीक हुई।

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सूत्रों ने बताया कि मोहित ने रामलला को पहनाने के बाद टिन्नू यादव को लाैटाने की बात कही, तो एसआइटी ने टिन्नू से पूछा। उसने यही बताया कि उसे उसी समय बेंगलुरु भेज दिया गया था। आभूषण रखने वाले कृष्णदेव तिवारी ने भी इससे अज्ञानता जताई। सूत्रों ने बताया कि अब उसकी न तो ईंट मिल रही, न रसीद।

अयोध्या के रोकड़िया हनुमान मंदिर के आचार्य विनोद मिश्रा ने दो दिन पहले मीडिया के सामने आकर बताया था कि जौनपुर के जंगही निवासी उनके भक्त अजय विश्वकर्मा ने पिता केदारनाथ व अन्य परिजनों के साथ 200 किमी पैदल अयोध्या आकर टिन्नू यादव के माध्यम से रामलला को रत्न जड़ित हार व चरण पादुका भेंट की थी।

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हार पर द्वाद्वश ज्योतिर्लिंग उकेरा गया था, तो पादुका पर 64 चरणों के चिह्न अंकित थे। दोनों बहुमूल्य रहे। उस समय उसकी पहने हुए रामलला की फोटो देने की भी बात हुई थी, लेकिन आज तक नहीं दी गई। अजय मुंबई में कारोबार करते हैं और उन्होंने वहीं पर उसे बनवाया था।

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